देश इस वक्त कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से मुश्किल दौर से गुजर रहा है। पूरे देश में तीन सप्ताह के लॉकडाउन समेत कई कदम एहतियातन उठाए गए हैं ताकि लोगों को कोविड 19 के संक्रमण से बचाया जा सके। ऐसे में पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रही देश की अर्थव्यवस्था लॉकडाउन की वजह से पटरी से उतर सकती है। इसको देखते हुए नरेंद्र मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर बड़ा कदम उठाने की तैयार कर रही है।

समाचार एजेंसी रायटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कोरोना वायरस के कहर से उबारने के लिए भारत सरकार 1.5 लाख करोड़ रुपये  यानी 19.6 बिलियन डॉलर का प्रोत्साहन पैकेज दे सकती है। सरकार ने अभी तक पैकेज फाइनल नहीं किया है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के बीच इसको लेकर बातचीत जारी है।

रायटर्स ने एक सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि प्रोत्साहन पैकेज  2.3 लाख करोड़ रुपये तक का हो सकता है, लेकिन इस पर अभी चर्चा की जा रही है। पैकेज का ऐलान इस हफ्ते के आखिर तक किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल 10 करोड़ गरीबों के बैंक एकाउंट्स में सीधे पैसे ट्रांसफर के अलावा लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित कारोबारों की मदद के लिए किया जाएगा।

दोनों सूत्रों ने बताया कि सरकार एक अप्रैल से शुरू हो रहे वित्त वर्ष 2020-21 के लिए कर्ज की राशि को भी बढ़ा सकती है। फिलहाल सरकार की  योजना अगले वित्त वर्ष के लिए 7.8  लाख रुपये कर्ज लेने की है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बैंक से सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदने के लिए कहा गया था, लेकिन महंगाई बढ़ने के डर से पिछले एक दशक से आरबीआई ने ऐसा नहीं किया। अधिकारी ने कहा कि आरबीआई को दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंकों की तरह बॉन्ड खरीदना पड़ेगा।

एक अधिकारी ने बताया कि सरकार केंद्रीय बैंक के वेज एंड मिन्स सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकती है। यह एक ओवरड्राफ्ट सुविधा है,जो नकदी की किल्लत होने पर केंद्रीय बैंक देश को देता है। वित्त मंत्रालय ने इस बारे में कॉमेंट करने से इनकार कर दिया और रिजर्व बैंक ने भी रॉयटर्स के मेल का कोई जवाब नहीं दिया।

भारत में कोरोना को लेकर काफी संकट की स्थिति बनी हुई है। पूरे देश को 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन कर दिया गया है। देश में अब तक कोरोना संक्रमण के 605 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 11 eलोगों की मौत हुई है। 

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