आज के वर्तमान समय में बहुत से लोग ऐसे हैं जो थायराइड की बीमारी से परेशान रहते हैं. जिन्हें थायराइड की बीमारी एक बार हो जाती है उन्हें पूरी जिंदगी दवाओं का सेवन करना पड़ता है. थायराइड एक हार्मोनल डिजीज है जो किसी को भी हो सकता है. हालांकि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में थायराइड होने की संभावना अधिक होती है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि थायराइड गर्दन में एक छोटी ग्रंथि है जो थायराइड हार्मोन बनाती है.

कभी-कभी थायराइड हार्मोन या तो बहुत ज्यादा बनने लगता है यह बहुत कम बनता है जो बीमारी का कारण बनता है.
बहुत अधिक थायराइड हार्मोन बढ़ने के कारण हाइपोथाइरॉयडिज़्म की समस्या होती है. जबकि यदि हार्मोन कम निकले हाइपरथायराइडिज्म की दिक्कत होती है. इन दोनों ही तरह की समस्याओं में शरीर में बेहद कमजोरी, थकान, मासिक धर्म की अनियमितता, तनाव, सांस फूलना जैसी कई परेशानियां शुरू हो जाती है.
इस बीमारी से राहत पाने के लिए एलोपैथिक में आजीवन हार्मोन्स की दवा सेवन करनी पड़ती है. इसके बावजूद भी थायराइड घटते बढ़ते रहता है. लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आयुर्वेद में कुछ ऐसी जड़ी- बूटियां है. जो इस रोग को जड़ से खत्म करने में कारगर होती है.
चलिए जानते हैं उन जड़ी- बूटियों के बारे में- 
1 .मुलेठी- 

मुलेठी एक जड़ी है जो आसानी से पंसारी की दुकान में मिल जाती है. मुलेठी में थायराइड को सामान्य करने के गुण मौजूद होते हैं. मुलेठी के पाउडर या इसके पानी को पीने से थायराइड में होने वाली कमजोरी और थकान को दूर किया जा सकता है. 2011 मैं टेक्सास में बायोसाइंस और टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट आई. इसमें यह पाया गया कि मुलेठी में ट्रीटरपेनोइड ग्लाइसेरीथेनिक एसिड मौजूद होता है जो न केवल थायराइड कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करता है बल्कि इन्हें बनने से भी रोकता है.
2 .अश्वगंधा- 

अश्वगंधा महिला व पुरुषों के कई गुप्त रोगों को दूर करने में अहम भूमिका निभाता है. लेकिन अश्वगंधा में थायराइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन स्कोर संतुलित करने का गुण भी मौजूद होता है. एंटीऑक्सीडेंट से भरा अश्वगंधा ग्रंथि को सही मात्रा में हार्मोन उत्पादन करने में मददगार होता है. हार्मोन संतुलन के साथ ही अश्वगंधा इम्यून सिस्टम को भी दुरुस्त करता है. अश्वगंधा का सेवन आप किसी भी रूप में कर सकते हैं. चाहे आप गोलियां ले सकते हैं या फिर इसका पाउडर का भी सेवन कर सकते हैं.
3 .गेहूं का ज्वारा- 

गेहूं का ज्वारा ब्लड और ब्लड रिलेटेड बीमारियों के साथ ही थायराइड हार्मोन पर भी बहुत इफेक्टिव है. गेहूं के ज्वारे को अपनी डाइट में प्रतिदिन शामिल करें.
4 .अलसी- 

अलसी में ओमेगा- 3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो थायराइड हार्मोन्स को संतुलित करने में मददगार होता है. ओमेगा 3 फैटी एसिड थायराइड ग्रंथि को सही तरीके से काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है. हाइपोथायरायडिज्म के रोगियों को अलसी का प्रयोग किसी भी रूप में जरूर करना चाहिए.
5 .काले अखरोट- 

सीफूड के अलावा काला अखरोट में आयोडीन का अच्छा स्रोत होता है. इसे वह नोट्स के रूप में खाना आपके हार्मोन्स के गति को सुधारता है.
6 .ब्लैडर रैक एक हर्ब- 
ब्लैडर रैक हर्ब भी हाइपोथायरायडिज्म और इससे जुड़ी बीमारियों में काफी लाभदायक साबित होता है. यह एक समुद्री शैवाल है जो आयोडीन से भरा होता है. यही कारण है कि यह थायराइड ग्रंथि को संतुलित कर हार्मोन उत्सर्जन को बढ़ावा देता है.
नोट- थायराइड से ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि अपनी लाइफ स्टाइल और खानपान में थोड़ा परिवर्तन कर इससे राहत पाया जा सकता है. वहीं एक्सरसाइज करना इस बीमारी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है. धन्यवाद.

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