एग्जिट पोल के नतीजे बताते हैं कि ध्रुवीकरण से आप के वोट में भाजपा ने सेंध लगाई, लेकिन कांग्रेस के अल्पसंख्यक वोट आप के पक्ष में जाने से उसकी भरपाई हुई। दिल्ली विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजों में आम आदमी पार्टी की सरकार स्पष्ट रूप से बनती हुई दिख रही है।

सरकार किसकी बनेगी, यह 11 फरवरी को नतीजे आने के बाद साफ होगा, लेकिन एग्जिट पोल के बाद एक चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इस चुनाव में शाहीन बाग का कोई असर हुआ या नहीं ? चुनावी विश्लेषकों की इस पर अलग-अलग राय है, लेकिन इसके बावजूद कुछ ऐसे स्पष्ट संकेत हैं जिनसे प्रतीत होता है कि शाहीन बाग का असर रहा।

इंडिया टुडे के एग्जिट पोल को आधार मानें तो आप के वोट दो और भाजपा के तीन फीसदी बढ़ रहे हैं। कांग्रेस के पांच फीसदी घटते है। कारण, शाहीन बाग के चलते वोटों का ध्रुवीकरण हुआ और भाजप़ा आम आदमी पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रही और उसने तीन फीसदी वोट झटक लिये। जिसकी वजह शाहीनबाग का ध्रुवीकरण हो सकती है।

दूसरी तरफ कांग्रेस के पांच फीसदी मत जो कम हुए हैं वे आम आदमी पार्टी की तरफ गए। वजह साफ है कि ध्रुवीकरण के चलते कांग्रेस को जाने वाले अल्पसंख्यक वोट आप को गए, ताकि भाजपा न जीतने पाए। यूं आप को तीन फीसदी नुकसान के बावजूद तो पांच फीसदी मतों का फायदा हो गया।

बंगाल में ऐसा ही हुआ
ऐसा ही ध्रुवीकरण पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनावों के दौरान भी दिखा था। भाजपा ने डटकर तृणमूल के खिलाफ चुनाव लड़ा। ध्रुवीकरण हुआ। भाजपा की सीटें दो से बढ़कर 18 तक जा पहुंची। ममता की सीटें 12 सीटें घटी। लेकिन यदि मत प्रतिशत देखें तो तृणमूल का 40 से बढ़कर 43 तथा भाजपा का 17 से बढ़कर 40 फीसदी हो गया। जबकि वामदलों के मत 30 से घटकर छह और कांग्रेस के 10 से घटकर छह फीसदी रह गए। वामदलों एवं कांग्रेस के 28 फीसदी वोट घटे। भाजपा के 23 और तृणमूल के तीन फीसदी बढ़े। लेकिन ऐसा नहीं था कि भाजपा ने वामदलों और कांग्रेस के वोट में सेंध लगाई। भाजपा ने तृणमूल के वोट में सेंध लगाई। लेकिन ध्रुवीकरण के चलते अल्पसंख्यकों के जो वोट वामदलों एवं कांग्रेस को जाते थे, वह तृणमूल को गये।

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